दर्द दिल – दीपक कुमार साहू

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तुम ना हो फिर भी में खुस हूं
तुम दूर हो फिर भी में खुस हूं,
जाने कितने यादें हैं
मेरे इस दर्द भरी दिल में,
जो तू कभी समझ नहीं पाया मेरे करीब हो के ।।

यदि दूर होना ही था प्यार का बीज बोया क्यूं,
यदि किसिके साथ दिल लगाना था इश्क किया क्यूं ।।

क्यूं मेरे मोहोबत को ठुकराया तूने,
मिला किया तुझे मेरे दिल को तोड़ कर ।।

तूने कहा था इस दीवार से नफरत हे मुझे,
पता मुझे क्यूं तू और के साथ अपनी महल सजा रही थी ।।

खाबों में कोई और हो ,तो खेयालों में किसीको लाना सही हे किया ?
मन में कोई और हो, तो इश्क करना सही हे किया ?

दीपक कुमार साहू
बल्लीगुड़ा, कंधमाल

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