श्रीराम – बिचित्र पण्डा

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श्रीराम से सीखिए सब
धर्म कैसे निभानि है ।
पित्रु धर्म का पालन करो
गर बनवास भी जानीं है।
होता है धर्म ये दोस्ती का
तै उम्र इसे निभानि है ।
धर्म पत्नी का मान रखे
चाहे राक्षस से लड़जानीं है ।
पालन हो धर्म प्रजा के लिए
पत्नी को क्यूँ ना त्याग नी है ।
दया करें प्रभु दुःख हरे
मेरा पुरुषोत्तम स्वाभिमानी है ।
जय श्रीराम

जगतसिंहपूर, ओडिशा

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