तू सोच जरा (२) – बिचित्र पण्डा

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ये ठान ले तू या मान ले तू
करना है जिसे तू खुद ही तो है ।
ये है दुनिया है तेरा कोई नहीं
है जीना तुझे मरना भी है ।।
सुन दिल् कि तू दिमाग का भी
रख ताल उनमें ये जरूरी है ।
कहीं रोके दिल् ना राह दिखे
जो बढ़ाए आगे दिमाग ही तो है ।।
तुझे करना है तुझे बढ़ना है
लेके साथ में सबको चलना है ।
है नफरत का ये सारा दुनिया
तुझे प्यार का बीजा बोना है ।।
ये है दुनिया है तेरा कोई नहीं
है जीना तुझे मरना भी है ।2।

जगतसिंहपूर, ओडिशा

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