दर्द दिल – दीपक कुमार साहू

तुम ना हो फिर भी में खुस हूं तुम दूर हो फिर भी में खुस हूं, जाने कितने यादें हैं मेरे इस दर्द भरी दिल में, जो तू कभी समझ नहीं पाया मेरे करीब हो के ।। यदि दूर होना ही था प्यार का बीज बोया क्यूं, यदि किसिके साथ […]

जख्म – बिचित्र पण्डा

कुछ् जख्म निशान दे जाते हैं कुछ् गीरोह पर छोड़ जाते हैं कुछ् ज़ुर्रत में बस जाते हैं ।। कुछ् दर्द देते हैं लमहो का कुछ् नैनों को पिघलाते हैं कुछ् उम्र भर तडपाते हैं ।। कुछ् बीन बोले कह जाते हैं कुछ् राज बने दबजाते हैं कुछ् कहानी बन […]

तू सोच जरा (२) – बिचित्र पण्डा

ये ठान ले तू या मान ले तू करना है जिसे तू खुद ही तो है । ये है दुनिया है तेरा कोई नहीं है जीना तुझे मरना भी है ।। सुन दिल् कि तू दिमाग का भी रख ताल उनमें ये जरूरी है । कहीं रोके दिल् ना राह […]

तू सोच जरा – बिचित्र पण्डा

तू सोच जरा मेहसूस तू कर कुछ है नहीं जो है तेरा । तेरा ज़िस्म भि तेरे साथ नहीं कर रूह को इससे दूर जरा ।। कुछ शिख जरा कुछ काम तु कर जो दिखता है वो भ्रम हि तो है । ना भाग तू इसके पिछे मगर तेरे पीछे […]

श्रीराम – बिचित्र पण्डा

श्रीराम से सीखिए सब धर्म कैसे निभानि है । पित्रु धर्म का पालन करो गर बनवास भी जानीं है। होता है धर्म ये दोस्ती का तै उम्र इसे निभानि है । धर्म पत्नी का मान रखे चाहे राक्षस से लड़जानीं है । पालन हो धर्म प्रजा के लिए पत्नी को […]

धर्म – बिचित्र पण्डा

ये धर्म है क्या मजहब तो नहीं बातें ये बहत पुरानी है । वो हिन्दु है हम मुसलिम है भाई ये तो बस एक कहानी है ।। जो कर्म तेरा हो धर्म तेरा न ये पैदाइशी निशानी है । न अलग है तू उन दूसरों से तेरा नस्ल भी इनसान […]

चुप रहना – बिचित्र पण्डा

कुछ् ऐसी सज़ा मिलीं हैं मुझको के चुप रहना कुछ् ऐसी जख्म मिलीं हैं मुझको न बता सकूं न दिखा सकूं, इसलिए अच्छा हैं चुप रहना देखना हैं कोन कितना क़रीब हैं मेरा, जो बिन बोले समझ जाएँ सारी बात, इसलिए चुप रहना जगतसिंहपूर, ओडिशा

सुबह – बिचित्र पण्डा 

देता हैं सुबह पैगाम ये के दिन तेरा भी आएगा जरूर । अन्धेरा हैं बस कुछ् पल का वह नूर लेकर आएगा जरूर । तुझे डटना हैं तुझे लड़ना हैं तुझे धैर्य से आगे बढ़ना हैं, तू ये दुःख कि रातें गुंजार ले तेरा हँसता सूरज आएगा जरूर। जगतसिंहपूर, ओडिशा

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